मईया वस्त्र तो धारण करवा दें

ठाकुर सेवा चल रही थी।

 मैं ठाकुर जी को स्नान करवा अभी टावल से पोंछ ही रही थी कि मेरा फोन बज उठा। 
मैं ठाकुर जी को यो ही छोड़ फोन उठाने चली गई।
फोन मेरी एक पुरानी सहेली का था।काफी लम्बे समय बाद आया था। मैंने फोन उठाया। हाय हैलो हुई। और वो पूछने लगी :- ओर सुना क्या कर रही थी? 

मैंने कहा :- कुछ नहीं। ठाकुर जी की सेवा में थी।
बस फिर बात करते-करते गोद में सिरहाना रख मैं वही बेड पर ही बैठ गई।कब आधा घंटा बित गया। पता ही नहीं पड़ी। 

अचानक ठाकुर जी मेरी गोद में रखें सिरहाने पर ही प्रकट हो गए और मोसे कहने लगे :- मईया वस्त्र तो धारण करवा दें।

नोट :- मुझे लगता है कि भावार्थ समझाने की आवश्यकता नहीं है। आगे आप स्वयं ही समझदार है। 
बस इतना समझ लो कि सेवा के समय केवल सेवा ही होनी चाहिए। 

****(जय जय श्री राधे)****

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