क्या था वक्फ से भी ज्यादा खतरनाक कम्युनल वायलेंस

*क्या था वक्फ से भी ज्यादा खतरनाक कम्युनल वॉयलेंस बिल जो सिर्फ 5 साल में भारत को मुस्लिम राष्ट्र में बदल देता । सारे प्रावधान जरूर पढ़ना दिमाग हिल जाएगा ।*

2011 में इस बिल की रुप रेखा सोनिया गाँधी की अर्बन नक्सली टीम ने तैयार की थी । इस बिल में निम्नलिखित प्रावधान थे

*प्रावधान नंबर 1* 
दंगों के दौरान दर्ज अल्पसंख्यक से सम्बंधित किसी भी मामले में सुनवाई कोई हिंदू जज नहीं कर सकता था ।

*प्रावधान नंबर 2*
अगर कोई अल्पसंख्यक सिर्फ ये आरोप लगा दे कि मुझसे भेदभाव किया गया है तो बिल पुलिस को ये अधिकार दे रहा था कि आपका पक्ष सुने बिना ही आपको जेल में डाल दिया जाए । वक्फ वाले पुराने बिल की तरह इन केसों में जज भी अल्पसंख्यक ही होगा ।

*प्रावधान नंबर 3*
कोई भी हिन्दू दंगों के दौरान हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ के लिये अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध केस दर्ज नहीं करवा सकता ।  । 

*प्रावधान नंबर 4*
अगर कोई अल्पसंख्यक समुदाय का व्यक्ति हिन्दू पर हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़, हत्या का आरोप लगाता है तो कोर्ट में साक्ष्य पेश करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं है केवल मुकदमा दर्ज करवा देना ही काफ़ी है । बल्कि कोर्ट में निर्दोष साबित होने की जिम्मेदारी उस व्यक्ति की है जिस पर आरोप लगाया गया है ।

*प्रावधान नंबर 5*
दंगों के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय को हुए किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए बहुसंख्यक को जिम्मेदार मानते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के नुकसान की भरपाई हिंदू से की जाएगी । जबकि बहुसंख्यक के नुकसान के लिए अल्पसंख्यक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता ।

*प्रावधान नंबर 6*
अगर आपके घर में कोई कमरा खाली है और कोई मुस्लिम आपके घर आता है उसे किराए पर मांगने के लिए तो आप उसे कमरा देने से इंकार नहीं कर सकते थे क्योंकि उसे बस इतना ही कहना था कि आपने उसे मुसलमान होने की वजह से कमरा देने से मना कर दिया यानि आपकी बहन बेटी को छेड़ने वाले किसी अल्पसंख्यक के खिलाफ भी हम कुछ नहीं कर सकते थे। मतलब कि अगर कोई छेड़े तो छेड़ते रहने दो वर्ना वो आपके खिलाफ कुछ भी आरोप लगा देता । आपकी सीधी गिरफ़्तारी और ऊपर से जज भी अल्पसंख्यक । 

*प्रावधान नंबर 7*
देश के किसी भी हिस्से में दंगा होता, चाहे वो मुस्लिम बहुल इलाका ही क्यों ना हो, दंगा चाहे कोई भी शुरू करता पर दंगे के लिए उस इलाके के वयस्क हिन्दू पुरुषों को ही दोषी माना जाता और उनके खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू होती। और इस स्थिति में भी जज केवल अल्पसंख्यक ही होता ऐसे किसी भी दंगे में चाहे किसी ने भी शुरू किया हो ।

*प्रावधान नंबर 8*
अगर दंगों वाले इलाके में किसी भी हिन्दू बच्ची या हिन्दू महिला का रेप होता तो उसे रेप ही नहीं माना जाएगा । बिल में ये मान लिया गया है कि बहुसंख्यक हिंदू की महिला के साथ रेप हो ही नहीं सकता है । इतना ही नहीं कोई हिन्दू महिला बलात्कार की पीड़ित हो जाती और वो शिकायत करने जाती तो अल्पसंख्यक के खिलाफ नफरत फ़ैलाने का केस उस पर अलग से डाला जाता ।

*प्रावधान नंबर 9*
इस एक्ट में एक और प्रस्ताव था जिसके तहत आपको पुलिस पकड़ कर ले जाती अगर आप पूछते की आपने अपराध क्या किया है तो पुलिस कहती कि तुमने अल्पसंख्यक के खिलाफ अपराध किया है, तो आप पूछते की उस अल्पसंख्यक का नाम तो बताओ, तो पुलिस कहती – नहीं शिकायतकर्ता का नाम गुप्त रखा जायेगा ।

*प्रावधान नंबर 10*
कांग्रेस के दंगा नियंत्रण कानून में ये भी प्रावधान था की कोई भी इलाका हो बहुसंख्यको को अपने किसी भी धार्मिक कार्यक्रम से पहले वहां के अल्पसंख्यकों का NOC लेना जरुरी होता यानि उन्हें कार्यक्रम से कोई समस्या तो नहीं है । ऐसे हालात में अल्पसंख्यक बैठे बैठे जजिया कमाते क्यूंकि आपको कोई भी धार्मिक काम से पहले उनकी NOC लेनी होती, और वो आपसे पैसे की वसूली करते और आप शिकायत करते तो भेदभाव का केस आप पर और ऐसे हालात में जज भी अल्पसंख्यक..

*बड़े बड़े न्यूज चैनलों पर यह बिल सुर्खिया बना हुआ करती थी पर जब 2014 में मोदी सरकार आई तो यह षडयंत्र धरा का धरा रह गया 

और शायद लोग इसे भूल भी गये है।
🙏🙏 🙏

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