सनातन धर्म में क्या है 3 का महत्व और क्यों

सनातन धर्म में क्या है 3 का महत्व और क्यों "ॐ शांति: शांति: शांति:" का तीन बार जाप किया जाता है?।।🌺

आईए जानते हैं ;🌺।।सनातन धर्म में 3 का महत्व।।🌺

3 - तीन देव - ब्रह्मा, विष्णु, महेश 

3 - तीन काल - भूत, भविष्य, वर्तमान

3 - तीन लोक - पृथ्वी, आकाश, पाताल

3 - तीन दुख - आधिदैविक, अधिभौतिक,    अध्यात्मिक 

3 - तीन गुण - सतस, रजस, तमस 

3 - तीन शक्ति - इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति

3 - तीन देवियां - महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी

3 - तीन स्तर - प्रारंभ, मध्य, अंत

3 - तीन पड़ाव - बचपन, जवानी, बुढ़ापा

3 - तीन रचनाए - देव, दानव, मानव

3 - तीन स्थिति - ठोस, द्रव, गैस 

3 - तीन अवस्था - जागृत, मृत, बेहोशी

3 - तीन नाड़ी - इडा, पिंगला, सुषुम्ना

3 - तीन संध्या - प्रात:, मध्याह्न, सायं

हमारे सनातन धर्म में किसी भी पद्धति के पीछे कारण जरूर होते हैं इसलिए हम सभी को जानना चाहिए कि सनातन क्या है। उसके अंग क्या है उसके कण कण में गूढ़ रहस्य छिपे हुए हैं लेकिन हमारे पास उन्हें जानने का या तो समय नहीं है या फिर हमें यह बता दिया गया कि आपका सनातन धर्म बेकार है इसे छोड़ो ईसाई बन जाओ, मुस्लिम बन जाओ,या अन्य कोई धर्म अपना लो यह सब तभी हो पाता है जब हमे अपने धर्म के बारे में ज्ञात नहीं होता।हमारे सनातन धर्म में शांति का अर्थ शांत करने से है स्थिर करने से है। वस्तुत: हम तीन प्रकार के दुखों को शांत करने के लिए 3 बार शांति का आह्वान करते हैं, इसलिए "ॐ शान्ति" तीन बार कहा जाता है।

वह 3 प्रकार के दुख जिनके लिए 3 बार शांति का आह्वान करते हैं, वे हैं🌺;

⚜️1. आधिदैविक - जैसे जो दुख हमें प्रकृति द्वारा मिले हो दैविय शक्तियों द्वारा मिले हो, जिन्हें रोकना हमारे लिए असंभव है, जैसे भूकंप, बाढ, ज्वालामुखी, बिजली गिरना आदि पहला जाप इनके लिए।

⚜️2. अधिभौतिक - जैसे जीव के द्वारा जीव को दिया गया दुख जैसे सड़क दुर्घटना, किसी जानवर आदि का काटना, चोरी द्वारा, बलात्कार हत्या आदि द्वारा जो दुख मिलता है वह अधिभौतिक दुख होता है दुसरा जाप उसके लिए।

3. आध्यात्मिक दुख - जो हम स्वयं के द्वारा स्वयं को देते हैं। जैसे अपनी 11 इंद्रियों को वश में न करने के कारण जैसे आंख से गलत देखकर गलत कार्य करना, कान से गलत सुनकर आगे किसी को गलत सुनाना गाली आदि, मन पर नियंत्रण न होने के कारण हम किसी पर क्रोध कर देते हैं फिर पछतावा करते हैं कि यह मैंने क्या कर दिया पारिवारिक क्लेश अपराध आदि। इसके लिए तीसरा जाप।

आमजनों के लिए यह दुखों से संबंधित है लेकिन आचार्य, गुरूओं, संन्यासियों ज्ञानीजनों के लिए यह इनका अर्थ हर उस कारण के लिए है जो 3 है जिनके बारे में मैंने आपको ऊपर बताया है।

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