बांग्लादेश में हिन्दू कत्लेआम के मास्टरमाइंड कौन ?भारत में निर्वासित जीवन बिता रही शेख हसीना ने कहा -- मोहम्मद यूनुस

बांग्लादेश में हिन्दू कत्लेआम के मास्टरमाइंड कौन ?
भारत में निर्वासित जीवन बिता रही शेख हसीना ने कहा -- मोहम्मद यूनुस 

बांग्लादेश के हिंदुओं की दुर्दशा काफी हद तक वैसी ही हो गई है जैसी 1947 में विभाजन के समय पाकिस्तान में हुई थी । तब भी गाजर मूली की तरह काटे जा रहे थे , आज वहां तो निपट ही गए , अब बांग्लादेश में कट रहे हैं । कुछ वर्ष पहले जो लोग भारत में लांचिंग की एक दो घटनाओं पर आसमान सिर पर उठाए हुए थे , बांग्लादेश में लिंचिंग की सैकड़ों घटनाओं पर उनके मुंह में दही जम गई है । 

शेख हसीना के मजबूर पलायन के बाद कुछ ही दिनों में 210 मंदिर तोड़ दिए गए , सैकड़ों बंगालियों को काट डाला गया । बेबस औरतों को मूत्र पिलाया जा रहा है , उनके मुंह में थूका जा रहा है । औरतों और हिंदुओं से सरे आम हो रही इस बर्बरता पर विश्व की मानवाधिकार संस्थाएं भी चुप हैं और अल्पसंख्यक आयोग भी । दुनियाभर की नारी अधिकार संरक्षण संस्थाओं ने आंखों पर काले चश्में चढ़ा लिए हैं । 

यूएनओ चुप है पश्चिमी जगत बड़ी संक्षिप्त प्रतिक्रियाएं दे रहा है , शांति सेना भेजने का सवाल एक हल्की सी मांग बनकर रह गया है । भारत में जो लोग और जो लाबियां इजरायल पर हाहाकार मचा रही थी , उन्होंने होंठ सिल लिए हैं । जिस बांग्लादेश का अस्तित्व इंदिरा जी की अगुवाई में भारत ने स्थापित किया , वही बांग्लादेश शेख हसीना के जाने के बाद कट्टर इस्लामिक हो चला है । यह शर्मनाक है , घोर शर्मनाक है । 

बंगाल , त्रिपुरा और असम में मोहम्मद यूनुस के खिलाफ़ लोग सड़कों पर उतर आए हैं । बंगाल में तो हजारों हिन्दुओं की भीड़ बांग्लादेश बॉर्डर के पास प्रदर्शन करने पहुंच गई । प्रदर्शन भारत के कुछ शहरों और दिल्ली में भी हुए हैं , अभी होते भी रहेंगे । लेकिन बांग्लादेश में हाय हत्या के अलावा सहायता या राहत के नाम पर कुछ भी नहीं हो रहा । कट्टरपंथी जमीयत के छात्रों ने ऐसा माहौल बना दिया है कि पुलिस और सेना उनके इशारों पर नाच रही है । रही बात यूनुस की , तो वे तो हत्यारे सिद्ध हुए हैं ।

ऐसे में सबसे ज्यादा पीड़ा भारत को हो रही है । मोदी साहब यह मसला भारत के राज्यों का नहीं , पड़ौसी देश का है । कभी वह भारत ही था , वहां हमारे ही लोग रहते हैं अतः पीड़ा अधिक है । इसलिए भी पीड़ा अधिक है कि उसका वजूद भारत ने खड़ा किया । अब हमारा बनाया यह देश अपने हिन्दू नागरिकों को ही नहीं कुचल रहा , हमें आँखें भी दिखा रहा है । यह ठीक है सरकार कूटनैतिक प्रयास कर रही है । हमारा विदेश मंत्रालय काफी सक्रियता से काम कर रहा है । लेकिन वहां किसी निर्वाचित सरकार का न होना बाधक बना हुआ है । हसीना के तख्ता पलट के बाद हर दिन हालत बद से बद्तर होते जा रहे हैं ।

Comments

Popular posts from this blog

1972 पर इंदिरा गांधी की प्रतिक्रिया व विचार क्या रहे अवश्य ही जाने

बात कड़वी है मगर सच्ची है

मै कहना चाहूंगी कि