विचार करें नहीं तो भुगतने के लिए तैयार रहें

इस टायर को बाहर निकालने का बस एक ही तरीका है, या तो टायर काटो या पेड़ काटो। सोचो और निर्णय लो दोनों में से 1 को तो कटना ही पड़ेगा, नहीं तो टायर और पेड़ को मजबूरी में एक-दूसरे के साथ रहना पड़ेगा, जबकि दोनों एक-दूसरे के प्राकृतिक रूप से सहायक नही हैं।

इस टायर को किसी शैतानी सोच वाले ने पेड़ के बड़े होने से पहले ही इसके गले में डाल दिया होगा। अब यही टायर इस पेड़ की मजबूरी बन गया है।

ठीक ऐसे ही शैतानी सोच के "गांधी-नेहरू ने वर्ष 1947 में भारत के 85% हिन्दुओं के गले में 14% मु&लमान रूपी टायर डाला था…? अब वो टायर काटना मुश्किल हो गया है

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