भगवान श्री राम
प्रभु श्रीराम धर्म के विग्रह स्वरूप हैं। जो धर्म है वही श्रीराम का जीवन है अथवा जो प्रभु श्रीराम का जीवन है वही धर्म है। भाई से भाई का व्यवहार, गुरु से शिष्य का व्यवहार, पत्नी से पति का व्यवहार, माता-पिता से पुत्र का व्यवहार, मित्र से मित्र का व्यवहार और प्रजा जनों से राजा के व्यवहार को धर्म की दृष्टि से देखना हो तो बस प्रभु श्रीराम के जीवन को देखना होगा।
प्रभु श्रीराम का संपूर्ण जीवन मानव समाज के लिए एक दर्पण के समान है जिसमें प्रत्येक मनुष्य द्वारा अपने आचरण के प्रतिबिंब को देखकर उसे सँवारने और सुंदर बनाने की सतत प्रेरणा प्रदान हो पाती है। सबके लिए और समष्टि के लिए जीना ही श्रीराम हो जाना है।
पावन अयोध्या धाम में विराजमान होकर श्रीराम लला की सात्विक ऊर्जा हजारों हजार वर्षों तक मानव जाति को अपनी सात्विक चेतना से सराबोर एवं आदर्श प्रेरणा पुंज से प्रकाशित करती रहेगी।
🚩जय सियाराम 🚩
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