सुखी एवं समृद्ध बनने का मार्ग परिश्रम है

सुखी एवं समृद्ध बनने का मार्ग परिश्रम है। सुखी एवं समृद्ध बनाने वाले साधन रत्न हर दिशा में पर्याप्त संख्या मे मौजूद है। मनुष्य का मनुष्य से सहयोग होने पर एक से एक बढ़िया आनंददायक अवसर उपलब्ध होते है मित्रता प्रेम प्रतिष्ठा आदर सेवा सहायता दान उदारता मधुरता आदि के द्वारा आपसी सहयोग होने पर सामाजिक जीवन में ऐसे ऐसे आनंदमय अवसर उपस्थित होते है जिन्हें रत्न से किसी प्रकार कम नहीं कहा जा सकता। विद्या की दिशा में लीजिए अध्ययन ज्ञान विशेषज्ञता के कारण मनुष्य जितना सूक्ष्म एवं समर्थ हो जाता है यह महत्व भी जवाहरात के थैले से कम नही है। उत्तम स्वास्थ्य का अच्छा होना अच्छा व्यवसाय मिल जाना एक सिद्धी से कम नहीं है। सद्गुण मीठा स्वभाव भले विचार सुन्दर चरित्र बहुमूल्य हीरक हारो की भाती विभूषित करने वाले आभूषण है। आत्मिक आनंद प्रसन्नता संतोष निराकुलता एवं जीवन मुक्ति सृष्टि की सर्वोच्च संपदा है। इस प्रकार विभिन्न दिशाओं में विभिन्न प्रकार के अनमोल जवाहरात पग पग पर बिखरे पड़े है। इनमे से अपनी योग्यता की प्रमाणिकता के आधार पर हर मनुष्य मन चाही मात्रा में प्राप्त कर सकता है। यह योग्यता की प्रमाणिकता जिसकी वजह से जीवन को आनंदमय बनाने के साधन प्राप्त होते है। केवल परिश्रमशीलता ही है। जय परमपूज्य गुरुदेव। धन्यवाद

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