कुछ बातें जो जानकारी में होनी चाहिए

👉 *शिव मन्दिर* में महाशिवरात्रि के दिन ध्वजारोहण करना चाहिए।
👉 *पार्वतीजी* के मन्दिर में चैत्र शुक्ल अष्टमी या आश्विन शुक्ल अष्टमी को ध्वजारोहण करना चाहिए।
👉 *गणेश मन्दिर* में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि के दिन ध्वजारोहण करने का विधान है।
👉 *विष्णु मन्दिर* में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अथवा रामनवमी या विजयादशमी अथवा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन ध्वजारोहण करना चाहिए।
👉 *सूर्य मन्दिर* में मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी तिथि को ध्वजारोहण करना चाहिए।
👉 इसके अतिरिक्त *अन्य देवताओं* के लिए *उनके उत्सव के दिन* ध्वजारोहण करना चाहिए।
👉 प्रयागतीर्थ स्थित आश्रम में रहकर तपस्या करने वाले मुनीश्वर *कुम्भोदर* ने भगवान श्रीराम को *तीर्थ यात्रा* की प्रेरणा देने के लिए ही रावण वध के कारण *'ब्रह्मघाती'* जैसे कटु वचन बोले थे।
👉 मुनीश्वर कुम्भोदर के कारण भगवान राम के सभी तीर्थ भ्रमण से *अनेक भक्तों* को उनके दर्शनों का लाभ प्राप्त हुआ।
👉 मुनि कुम्भोदर के वचन सुनकर ही भगवान राम ने पृथ्वी पर स्थित *सभी तीर्थों* की यात्रा सीताजी के साथ सम्पन्न कर अश्वमेध यज्ञ किया।
👉 बाद में कुम्भोदर मुनि ने स्पष्ट किया कि परब्रह्म परमात्मा *राम* पर किसी प्रकार के दोष का संश्लेष नहीं होता है।
👉 भगवान उपेन्द्र (वामन) के चरणों की *श्वेत धूलि* के मिश्रण के कारण ही गङ्गाजी हमेशा *श्वेत वर्ण* धारण करती हैं। गङ्गाजी के जल में वामन भगवान के *चरणरज कण* आज भी दिखाई देते हैं।
👉 श्री सीताराम का *अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र* के पाठ करने से अनेक कामनाओं की सिद्धि प्राप्त होती है।
           

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