शर्मिष्ठा नाम की कोई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बच्ची है।

शर्मिष्ठा नाम की कोई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बच्ची है। जल्दी फेमस होने के लिए शॉर्टकट अपना रही थी। पाकिस्तान और बॉलीवुड को गरियाते-गरियाते भावनाओं में बह कर हुजूर-ए-पीस की शान में गुस्ताखी कर बैठी। अब शांतिप्रिय कौम का खून उबाल मार रहा है। "सर तन से जुदा" के नारे लगाए जा रहे हैं। बच्ची अब घबरा कर माफी मांग रही है। 
.
खैर, सर तन से जुदा नहीं होगा। ये कोई शरिया मुल्क नहीं है। पर जो बातें उस बच्ची ने कहीं, वे बेहद घटिया भाषा में बेहद गैरजरूरी बातें थी। जो उसे हिन्दू शेरनी समझ रहे हों, उन्हें मैं बता दूं कि मोहतरमा की जुबान हिंदुओं को भी नहीं बख्शती। एक वीडियो देखा, कह रही थीं कि - भगवान मुझे पैदा करते समय बहुत हगे थे। 
.
बहरहाल, बच्ची उम्र में छोटी है। हम तो यही चाहेंगे कि उसे नादान समझ कर माफ कर दिया जाए। मैं ये भी चाहूंगा कि ऐसे लोगों को पकड़ कर महीने पंद्रह दिन के लिए सबक सिखाने के लिए तिहाड़ की सैर जरूर करानी चाहिए। ताकि ये भविष्य में पॉपुलैरिटी के लिए सस्ते हथकंडे अपनाने से बाज आएं। 
.
एक प्रैक्टिकल सलाह मैं अपने अग्निमूतक हिन्दू शेरों/शेरनियों को भी देना चाहूंगा कि आप इस्लाम की आलोचना करें। कठमुल्लों की करें। स्वयं मोहम्मद साहब की आलोचना करें। आलोचना से परे कोई नहीं है। पर मोहम्मद पर बात करते हुए कम से कम भाषा ठीक रखें। इस बच्ची की तरह जोश में आ कर गाली-गलौच पर न उतर आएं। 
.
हमेशा ध्यान रखें। एक मुसलमान इस्लाम अथवा कठमुल्लों पर कही बात बर्दाश्त कर लेगा। यहां तक की खुद अल्लाह पर की गई टीका-टिप्पणी सुन लेगा। पर हुजुरेआला की शान में तौहीन पर पगला हो जाएगा। मुहम्मद की शान में गुस्ताखी वो बॉर्डरलाइन है, जिसे तभी पार करिये, जब आपके आगे-पीछे कोई रोने वाला न हो। 
.
वैसे तो दुनिया में पागलों की संख्या बहुत है पर बहुसंख्या इस्लाम में ही पाई जाती है। कानून-वानून का इन्हें भय नहीं है। जब तक ये आपको अल्लाह मियाँ के पास रुख़सत न कर देंगे, तब तक चैन से न बैठेंगे। अपनी सुरक्षा अपने हाथ रखिये। थोड़ा बोलने से पहले तौलना सीखिए। 
.
और अगर आप मुगालते में बैठे हों कि ऐसे मामलों में राष्टरवादी पाल्टी का कोई नेता आपके साथ खड़ा हो जाएगा तो आप एक नम्बर के चुटियम सल्फेट हैं। संकट के समय में अपने समर्थकों का साथ छोड़ देने के मामलें में ब्रह्मांड की सबसे फट्टू पार्टी एक ही है। नाम तो पता ही होगा। बताने की जरूरत है?


Comments

Popular posts from this blog

1972 पर इंदिरा गांधी की प्रतिक्रिया व विचार क्या रहे अवश्य ही जाने

बात कड़वी है मगर सच्ची है

मै कहना चाहूंगी कि