जिन्होंने कभी किसी पर विश्वास जताया ही न हो, उनके अविश्वास_प्रस्ताव का भला क्या अर्थ रह जाता है ??

जिन्होंने कभी किसी पर विश्वास जताया ही न हो, उनके अविश्वास_प्रस्ताव का भला क्या अर्थ रह जाता है ??

इन विपक्षी नेताओं ने न्यायपालिका पर, चुनाव आयोग पर, सीबीआई पर, सेना पर, NIA पर, BSF पर तथा अन्य किसी भी संस्था पर क्या कभी विश्वास जताया है ?? समय-समय पर  यह लोग इन सभी संस्थाओं पर सवाल उठाते रहते हैं। सभी के ईमान धर्म और कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाकर जनता की निगाह में उनकी इमेज खराब करने में लगे रहते हैं। ऐसे लोगों की इमेज भी जनता ने कुछ खास बना ली है अपनी निगाहों में,,, ऐसे लोगों के अविश्वास प्रस्ताव का फिर भला क्या मतलब रह जाता है... कितना महत्व रह जाता है..??

अब ये लोग राज्यसभा के सभापति और उप-राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ जी के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं। यह अविश्वास प्रस्ताव पास तो कतई नहीं हो पाएगा, हां यह जरूर है कि इसके जरिए ये लोग शायद उन पर कुछ मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यही इनकी नीयत है और इनकी नियति भी यही है।

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