आपको पता है एक समय आपके शिक्षा मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय ही होता था लेकिन बीच मे HRD मिनिस्ट्री कर दिया गया
आपको पता है एक समय आपके शिक्षा मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय ही होता था लेकिन बीच मे HRD मिनिस्ट्री कर दिया गया और अब मोदी सरकार ने उसे वापिस बदल शिक्षा मंत्रालय कर दिया।
सोचा है कभी कि इसका नाम HRD अर्थात ह्यूमन रिसोर्सेज डिपार्टमेंट क्यों रखा था?
क्योंकि जैसे कोयला, तेल आदि को पश्चिम ने एक रिसोर्स माना और उसका दबाकर दोहन किया, ऐसे ही पश्चिम के अनुसार इंसान भी एक रिसोर्स है जिसका दबाकर दोहन अपने फायदे के लिए किया जाना चाहिए।और किसी शिक्षा मंत्रालय का नाम HRD रखना भी ये था कि ऐसी शिक्षा बनाओ जिससे इंसान बड़े बड़े कॉरपोरेट का नौकर बनकर रह जाये जिसको जितना चूस सको उतना चूसो, ताकि कॉरपोरेट्स प्रॉफिट कमा सकें।
इसी के लिए बना वर्क "कल्चर"
आपकी शिक्षा ही 9-4 के स्कूल से शुरू होकर आपको 5 साल की उम्र से ट्रेंड किया गया है ताकि बाद में आप 9-5 की नौकरी कर सको।
आपकी एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी जो आपको स्कूल में ये बोलकर कराई जाती है कि बच्चा इससे अन्य चीजें सीखेगा, वो कुछ नही बल्कि आपको ओवरटाइम के लिए तैयार करना है, वरना एक्स्ट्रा करिकुलम की क्या जरूरत, वो तो शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा ही होनी चाहिए था, जो आपको व्यवहारिक शिक्षा दे सके जब आप समाज के बीच जाओ।
आखिर शिक्षा का मतलब ही यही है कि एक अनुशासित और व्यवहारिक व्यक्ति का निर्माण करना जिसमें स्किल्स हों।
लेकिन आपको बस ह्यूमन रोबोट्स बनाया गया है जो बस क्रोपोरेट्स के लिए पैसा बनाये।आप इसमें खुश हैं कि कॉरपोरेट्स में 5 डिजिट सेलरी मिल जाती है यदि आप "टैलेंटेड" हैं जबकि असलियत में आप जितने ज्यादा उनके लिए रिसोर्स हैं उस हिसाब से आपको 5 या 6 डिजिट में मजदूरी मिलती है।कहने का मतलब पहले गुलाम होते थे और अब पढ़े लिखे गुलाम होते हैं। नौकरी को नौकरी इसीलिए कहते हैं क्योंकि वो नौकर के करने की चीज होती है।
तो कुल मिलाकर बताना ये है कि इसी वजह से आप ह्यूमन रिसोर्स थे और आपकी शिक्षा का मंत्रालय ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट था जो एक बढ़िया "टैलेंटेड" नौकर तैयार कर सके जिसका दोहन कर कॉरपोरेट ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट कमाएं।और फिर जब उस मजदूरी का मेहनताना कॉरपोरेट दें तो फिर दूसरी तरफ सेम कॉरपोरेट आपको ये भी सीखा गया कि यदि सोसायटी में हाई क्लास दिखना है तो जो हम कह रहे वो सब खरीदो, जिससे दूसरी तरफ तुम्हारे को दिया पैसा वापिस उनके पास ही चला गया।और इसे ही बाजारवाद, भौतिकवाद, कंज्यूमरिज्म आदि कहा गया है।
जिस वजह से तुम सिर्फ पैसा बनाते रह गए और अपना परिवार भूल गए।न सिर्फ तुम्हारे मां बाप बल्कि खुद को मां बाप बनाना तक भूल गए।।और इसी वजह से आज दुनिया के सो कॉल्ड फर्स्ट वर्ल्ड कंट्री में जन्मदर 1 से लेकर 1.5 के बीच चले गयी है।लेकिन कॉरपोरेट्स को इसलिए चिंता नही क्योंकि अब ऐसी टेक्नोलॉजी आ चुकी कि रोबोट्स से काम ले सकते हैं, मशीनें तो हैं ही।
इसलिए जितना जल्दी हो, तुम कम होते जाओ और खत्म ही हो जाओ, वरना फिर सड़क पर उत्पात करोगे कि हमबेरोजगार हैं और काम रोबोट्स से कराया जा रहा है।क्योंकि रोबोट्स शिकायत भी तो नही करते।बस वन टाइम इन्वेस्टमेंट करना है उनपर।
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