हिन्दुओं को भी हलाला ज्ञान आवश्यक"*

*आप अपनी आंखें खोलो**
**हिन्दुओं को भी हलाला ज्ञान आवश्यक"*

अधिकांश लोग यही जानते हैं कि केवल मुस्लिम महिला का ही तीन तलाक के बाद हलाला होता है यह तो एक पक्ष है। हलाला का दूसरा पक्ष भी जानिएं जिससे अधिकांश हिन्दू अन्जान हैं :- "हलाला" का शाब्दिक अर्थ है-उपयोग करने वाली कोई भी वस्तु चाहे वो खाने की, पहनने या रहने की हो, कुरान के अनुसार उसे उपयोग से पहले पवित्र (हलाल) करना जरूरी है। इसके लिए "मौलवी" पहले कलमा पढ़कर अपने मुँह को पवित्र करेगा फिर अपने मुँह का पवित्र थूक उस वस्तु में डाल देगा और वह पवित्र हो जाएगी। व्यस्तताओं के कारण हर समय मौलवी भी उपलब्ध नहीं हो पाता और उसे फीस भी देनी पड़ती है। इसलिए अब यह काम "कारोबारी लोग" स्वयं ही कलमा पढ़कर और थूक वस्तुओं में डालने का काम निपटा रहे हैं। आपने देखा सुना होगा कि मुस्लिम रसोईया रोटियों में थूक डाल रहा था, फल बिक्रेता फलों में थूक लगा रहा था वो वास्तव में अपने धर्म के अनुसार अपने थूक से उसे पवित्र कर रहा होता है, जितने भी मुस्लिम होटल होते हैं वहां इसी तरह आटे, दाल, सब्जी में थूक डालकर हलाल किया जाता है। आप देख सकते हैं कि मुस्लिमों द्वारा बनाई गयी खाने-पीने की वस्तुओं, दवाईयों व अन्य पैकेटों पर एक कोने में लिखा होता है - "हलाल"। संक्षेप में यही वो थूक प्रक्रिया (हलाल) है। आपको क्या करना चाहिए आप स्वयं अपनी बुद्धि का उपयोग कर सकते हैं। आपको थूक ज्यादा स्वादिष्ट लगता हो तो आपकी मर्जी ।।

सबका साथ सबका विकास। 

एक पिता ने अपने पुत्र को "महाभारत" की कथा सुनाते हुए कहा…*महाभारत से पहले कृष्ण भी गए थे दुर्योधन के दरबार में. यह प्रस्ताव लेकर, कि हम युद्ध नहीं चाहते...."तुम पूरा राज्य रखो".... पाँडवों को सिर्फ पाँच गाँव दे दो...
वे चैन से रह लेंगे, तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे.।बेटे ने पूछा - "पर इतना असंगत प्रस्ताव लेकर कृष्ण दुर्योधन के दरबार में क्यों गए थे …? अगर दुर्योधन प्रस्ताव स्वीकार कर लेता तो..??
पिता :- नहीं करता....कृष्ण को पता था कि वह दुर्योधन कभी प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेगा...
*यह उसके मूल चरित्र के विरुद्ध था"पुत्र :- जब कृष्ण दुर्योधन के चरित्र से परिचित थे तो फिर यह प्रस्ताव लेकर गए ही क्यों थे..?"वे तो सिर्फ यह सिद्ध करने गए थे कि दुर्योधन कितना अभिमानी और कितना अन्यायी था।"*वे पाँडवों को सिर्फ यह दिखाने गए थे, कि देखो..युद्ध तो तुमको लड़ना ही होगा... हर हाल में...अब भी कोई शंका है तो निकाल दो....मन से.तुम कितना भी संतोषी हो जाओ,कितना भी चाहो कि "घर में चैन से बैठूँ "..दुर्योधन तुमसे हर हाल में लड़ेगा ही"लड़ना"... या "ना लड़ना" तुम्हारा विकल्प नहीं है...फिर भी बेचारे अर्जुन को आखिर तक शंका रही..."सब अपने ही तो बंधु बांधव हैं...कृष्ण ने सत्रह अध्याय तक समझाया... फिर भी शंका थी..ज्यादा अक्ल वालों को ही ज्यादा शंका होती है ना
"दुर्योधन को कभी शंका नही थी"..उसे हमेशा पता था कि "उसे युद्ध करना ही है... "उसने गणित लगा रखा था....हिन्दुओं को भी समझ लेना होगा कि :-"कन्फ्लिक्ट होगा या नहीं,यह आपका विकल्प नहीं है...
आपने तो पाँच गाँव का प्रस्ताव भी देकर देख लिया...
देश के दो टुकड़े मंजूर कर लिए,हर बात पर विशेषाधिकार देकर देख लिया....उनके लिए अलग नियम कानून (धारा 370) बनवा कर देख लिए..."आप चाहे जो कर लीजिए, उनकी माँगें नहीं रुकने वाली"
हे अर्जुन,
और संशय मत पालो...कृष्ण घंटे भर की क्लास बार-बार नहीं लगाते..25 साल पहले कश्मीरी हिन्दुओं का सब कुछ छिन गया..... वे शरणार्थी कैंपों में रहे, पर फिर भी वे आतंकवादी नहीं बनते...जबकि कश्मीरी मुस्लिमों को सब कुछ दिया गया..वे फिर भी आतंकवादी बन कर जन्नत को जहन्नुम बना रहे हैं पिछले साल की बाढ़ में सेना के जवानों ने जिनकी जानें बचाई वो आज उन्हीं जवानों को पत्थरों से कुचल डालने पर आमादा हैं....
इसे ही कहते हैं संस्कार.....ये अंतर है "धर्म" और "मजहब" में..!!
एक जमाना था जब लोग मामूली चोर के जनाजे में शामिल होना भी शर्मिंदगी समझते थे....
और एक ये गद्दार और देशद्रोही लोग हैं जो खुले आम... पूरी बेशर्मी से एक आतंकवादी के जनाजे में शामिल हैं..!
सन्देश साफ़ है,,,
अब भी अगर आपको नहीं दिखता है तो...
यकीनन आप अंधे हैं !
या फिर शत प्रतिशत देश के गद्दार..!!
आज तक हिंदुओं ने किसी को हज पर जाने से नहीं रोका...
लेकिन हमारी  यात्राएं हर साल बाधित होती है !
फिर भी हम ही असहिष्णु हैं.....?
ये तो कमाल की धर्मनिरपेक्षता है भाई।

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