वो खौफनाक साल

वो खौफनाक साल।

आप लोगों को याद होगा मनमोहन सिंह के जमाने में देश में आतंकवादी घटनाओं की बाढ़ आ गई थी। पाकिस्तान एक अघोषित युद्ध लड़ रहा था। यह खुलेआम था।

 मनमोहन सिंह के समय में मुंबई पर खतरनाक हमला हुआ। अहमदाबाद, जयपुर, बनारस, दिल्ली जैसे तमाम शहरों में सीरियल ब्लास्ट हुए और बहुत से शहरों तथा ट्रेन में बम ब्लास्ट भी हुए। 

मुंबई में रहने वाले मेरे मित्र प्रदीप जी कहते हैं" उन दिनों इतना डर लगा रहता था कि बाहर निकलते समय ऐसा महसूस होता पता नहीं वापस भी आयेंगे या किसी आतंकवादी विस्फोट में मारे जाएंगे,।

इन घटनाओं में हजारों लोग मरे थे और खरबों की संपत्ति का नुकसान लगातार 10 साल होता रहा।

 दरअसल हर महीने कहीं ना कहीं आतंकवादी घटनाएं होती रहती थी।

उसका सबसे बड़ा कारण यह था इशरत जहां केस में गुजरात पुलिस को इनपुट देने वाले आईबी के स्पेशल डायरेक्टर राजेंद्र कुमार तथा आईबी के सीनियर अधिकारी एमएस सिन्हा राजीव वानखेडे और टीएस मित्तल को गिरफ्तार कर लिया था।

दरअसल गुजरात पुलिस ने आईबी रिपोर्ट यानी आईबी की इनपुट के आधार पर कार्रवाई किया था, इसलिए अहमद पटेल ने सोचा यदि मोदी को इस केस में फंसाना है और अमित शाह को इस केस में फंसाना है तो सबसे पहले आईबी अधिकारियों को भी जेल में सड़ाना होगा।
जिससे अधिकारियों,कर्ताओं में ही डर बन जाए। बेसिकली उन्हें सिस्टम पर मुस्लिम सपोर्टर शासन का मैसेज देना था।

अपनी घटिया राजनीति के चलते ही केंद्र की कांग्रेस सरकार चिदंबरम सोनिया गांधी, अहमद पटेल और मनमोहन सिंह जैसे नीच लोगों ने आईबी के बेहद सीनियर अधिकारियों को जिसमें एक बेहद सीनियर अधिकारी यानी स्पेशल डायरेक्टर थे उन्हें जेल में डाल दिया।

 इसका नतीजा यह हुआ आईबी के लोग इतना डर गए कि उस घटना के बाद किसी ने इनपुट देना ही बंद कर दिया।  इसका फायदा पाकिस्तान, आतंकवादियों के साथ साथ भारत के एक बड़े स्लीपर सेल ने भी उठाया।देश में खूब आतंकी घटनाएं हुई और सैकड़ों लोग मारे गए। अरबो रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ।

 इसीलिए मित्रों मैं कहती हूं अगर कोई कांग्रेसी कुत्ता आपके घर वोट मांगने आए तब उसका स्वागत आप जूते से करिए। यह मुस्लिमों को खुश करने के लिए नीचता की हद तक गिर सकते हैं उनका सारा का सारा शासन इसका गवाह है।

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