रणनीतिक भिक्षा....
रणनीतिक भिक्षा....
राजनीति मे तो भीख देना भी एक राजनीति है, ज़ब किसी देश पर मुसीबत आती है और उसे भीख मिल जाती है तो वो खुद को आत्मनिर्भर नहीं बनाता बल्कि परनिर्भर हो जाता है अमेरिका ने पाकिस्तान को भीख दी,और अब बंद कर दी, पाकिस्तान आपके सामने है।इसके विपरीत परमाणु हमले के बावजूद,जापान अपने पैरो पर खड़ा है।भारत ने मालदीव को 3 साल पहले प्राकृतिक आपदा के समय 100 मिलियन डॉलर का फ्री क्रेडिट दिया था। फिर एक भारत विरोधी सरकार वहाँ आयी, उसने काफी उत्पात मचाया।
लेकिन मालदीव को फिर से जरूरत पड़ी और उसे भारत की ही तरफ देखना पड़ा, इस बार भारत ने आगे से मदद नहीं की।मालदीव को सिर झुकाकर भिक्षा पात्र आगे करना पड़ा और नतीजा यह हुआ कि मालदीव का हृदय परिवर्तन ही हो गया।
इसलिए ये भिक्षा बड़े काम की चीज है,
बांग्लादेश को भी भारत ने म्यांमार, नेपाल और भूटान से व्यापार करने के लिये फ्री हैंड दिया था। बांग्लादेशी व्यापारी भारत की जमीन प्रयोग करके इन देशो मे व्यापार कर पा रहे थे।लेकिन फिर मोहम्मद यूनुस को कुछ सुझा उसने चीन जाकर बयान दे दिया जिसका मतलब यही निकलता है कि वो चीन को बुलाकर भारत का नॉर्थ ईस्ट काटना चाहता हो। चीन इस समय भारत से संबंध बिगाड़ने के मूड मे नहीं है।लेकिन भारत ने इस बात को सीरियस लिया, मोदीजी को बिमस्टेक समिट के लिये थाईलैंड जाना ही था वहाँ यूनुस से भी मिलना पड़ा। यूनुस ने पेंटिंग गिफ्ट की और अल्पसंख्यक वाली नसीहत भी ले ली।
यूनुस मानकर चल रहा था कि अमेरिका के टैरिफ़ भले ही लग गए हो मगर भारत तो शराफत निभायेगा ही।लेकिन ये दाँव बिल्कुल उल्टा पड़ा, भारत ने बांग्लादेश का ये रास्ता रोक दिया और आधार यूनुस के बयान को ही बनाया।ये मास्टर स्ट्रोक है
मास्टर इसलिए क्योंकि इसकी टाइमिंग कमाल की है। यदि ये ही काम 4-6 महीने पहले करते तो जो बाइडन का अमेरिका उसे बेक करता, यूनुस और सेना की अच्छी बन ही रही थी।
ऐसे मे ये दाँव तब खेला गया ज़ब बांग्लादेश को भारतीय मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है। यूनुस पर भीतर घात हो रहे है, अर्थव्यवस्था डामाडोल हो रही है ऊपर से अमेरिका के टैरिफ़।
डोनाल्ड ट्रम्प तो बोल चुके है कि--बांग्लादेश मोदीजी पर छोड़ दिया जाना चाहिए।ऊपर से यूनुस का बयान जिसने इस प्रतिबन्ध को जायज कर दिया। देखा जाए तो भारत को बांग्लादेश की इन्ही हरकतों की प्रतीक्षा करनी होंगी।हमला भी ऐसे ही होगा, सीधे हमला कर दिया तो संप्रभुता पर हमला हो जाएगा। नेपाल, भूटान और श्रीलंका पेनिक करेंगे,समय की मांग ये है कि बांग्लादेश को ऐसे ही आर्थिक क्षति पहुँचे और फिर वो विचलित होकर बस एक सैन्य कार्रवाई कर दे।यदि ऐसा हो गया तो भारत का आक्रमण तार्किक सिद्ध होगा, उत्तरी बांग्लादेश के इलाको को हमारी सेना कब्जा सकती है।या जन आंदोलन कराये जा सकते है। हालांकि उनकी जनता हमें नहीं चाहिए वो एक चुनौती है मगर जमीन तो ले सकते है।शर्त बस एक कि पहली चाल बांग्लादेश चले भारत नहीं। बांग्लादेशी जितने बड़े अनपढ़ है उनसे इस समझदारी की उम्मीद तो कर ही सकते है कि वे अपनी सेना से बस भारतीय क्षेत्र को एक बार आक्रमण करवा दे। ये अंतिम शूल है फिर भारत जो चाहे कर सकेगा।
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